कहानी एक बन्दर का KAHANI EK BANDAR KA

Shayr

कहानी एक बन्दर का KAHANI EK BANDAR KA 

 

कहानी एक बन्दर का नमस्कार दोस्तों आप सब कों HARJANKARI.COM में स्वागत है | आज हम इस पोस्ट में एक मनोरंजन कहानी बताऊंगा जिसे एक बार जरुर पढे .एक गाव में एक गरीब आदमी रहता था जिसका नाम मोहन था उनके एक लड़का था उसकाएक गाव में एक गरीब आदमी रहता था उसका नाम मोहन था उसका एक लड़का था जिसका उम्र

पंद्रह वर्ष का था जिसका नाम राजेश था  दिन गुजरता गया कुछ दिनों के बाद राजेश के पिताजी के देहांत हो गया उस समय राजेश पढ़ रहा था पिताजी के देहांत के बाद राजेश की  माँ ने उसकी पढ़ाई नहीं छोड़ने दी राजेश सीधा- साधा लड़का था कुछ दिनों के बाद राजेश की माँ ने  कहा बेटा मेला लगा है |तुम मेला जाओ और एक अच्छी

 

गाय खरीद कर लाओ जिससे आपना दिन गुजर बसर करेंगे राजेश की माँ ने पांच रूपये देते हुए कहा एक अच्छी गाय देखकर खरीदना राजेश ने चल दिया जब मेला पहुचा तो चलबिधर गाय खोजने लगा उसे पुरे मेले में कही उसके मन योग गाय नहीं दिखी एक बन्दर वाला बन्दर लेकर आया था वह बन्दर बहुत उचल कूद रहा था राजेश कों बन्दर ही पसंद आ गया और बंदर कों खरीद कर अपने घर की ओर चल दिया घर बैठी उसकी माँ बेसब्री से इन्तजार कर रही थी सुलेखा प्रेम कहानी 

 

की राजेशगाय कों लेकर क्यों नहीं आया इतने में राजेश दिखाई देता है | उसने बंदर कों ले आते हुए देखा तो उसकी माँ ने छाती पीटने लगी और राजेश कों बोलने लगी ये तू क्या किया मैंने तुझे गाय कों खरीदकर लाने के लिए बोला था और तूने बंदर कों ले आया क्या हमारा इससे पेट पलेगा राजेश कों डाटने लगी बन्दर सभ बाते सुन

 

रहा था कुछ देर बाद बन्दर बोला  बोला माई घुसा मत कीजये  सब कुछ ठिक हो जायगा राजेश की माँ बोली कैसे मान जाऊ कितने मेहनत से मैंने कुछ पैसे इकठा किया था और उस पैसे से तुझे खरीद कर ले आया क्या तुझसे हमारा दिन कटेगा ,बन्दर बोला घबराऔ मत समय आने पर सब ठिक हो जाएगा राजेश की  माँ मन मरकर बैठ गई दिन गुजरता गया एक दिन बन्दर घुमने निकला और घुमते-घुमते दुसे राज्य में चला ADNATIONAL

बन्दर दुसरे राज्य में जाने के बाद

वाहां के राजा के लड़की, की शादी थी राजा ने सोनार के यहाँ गहने बनाने के लिए दिया था सोनार गहने बना रहा था, तब तक बन्दर वंहा पहुचा कुछ देर बंदर सोनार कों गहने बनाते देखता रहा, कुछ देर बाद बंदर बोला, सोनार भाई ये गहने किसके किये बना रहे हो. सोनार कुछ देर बाद बोला यहाँ के राजा के लड़की के लिए बना रहा हु उस लड़की की शादी में देने के लिए , यह सोनार की बात सुनकर बंदर कुछ देर सोचता रहा फिर बोला सोनार भाई ये गहने मुझे पहनाओं ना की मै कैसा लग रहा हु इतने में सोनार बोला तुम गहने पहनकर क्या करोगे ,बंदर बोला तुम राजा के लड़की के

 

लिए गहने बना रहे हो कुछ भी गहने में खराबी हो गई तो राजा इस राज्य से निकाल देगा इसलिए तुम एक बार पहनाकर देख लो की ये गहने कैसे लग रहे है |फिर निकाल लेना , सोनार बन्दर की बातो में आगया और बंदर कों गहने पहना दिया बंदर दो

 

कदम पीछे हटा और बोला की मै मुझमे गहने कैसे लग रहे है |सोनार बोला ठीक लग रहे है |अब आ जाओ बंदर दो कदम फिर पीछे बंदर भागने के आस पास देखा और भाग निकला भागते – भागते दुसरे राज्ये में चला गया इस रजा के राजे से बहुत दूर बंदर अपने आपने घर जा रहा था| तब तक उस राज्य के अपने जीवन में कामयाबी के 

 

राजा ने देखा तो सोचने लगा जिस राजा के बंदर ने इतने गहने पहने है |वो राजा कैसा होगा ये राजा मन ही मन सोचकर बोले , तुम किस राजा के यहाँ रहते हो |बंदर बोला मै चन्दनपुर राजा और मेरे राजा का नाम मोहन है |लेकीन मोहन कों देहांनत होने से उस राज्य का सारा काम मै ही करता हु |तब राजा बोले क्या उनके कोई लड़का नहीं है | बंदर बोला एक लड़का है |राजा बोले शादी हो गई है |बंदर बोला नहीं अभी नहीं हुई है |क्योकि अभी उसके योग लड़की नहीं मिली इसलिए अभी मेरे राजा की शादी नहीं हुई है |राजा सोचते हुए

 

मेरी एक लड़की है |क्या मेरी लड़की से शादी करेंगे | बंदर बोला क्यों नहीं मै जो बोलूंगा मेरी बात कभी नहीं टालेंगे बंदर ने शादी तय कर दी और बंदर अपने घर आकर  बन्दर नेसारी बात बता दीऔर कुछ गहने बेचकर एक माकान बनवा दिया बंदर बरात लेकर राजा के यहाँ पहुचा शादी हो गई सुबह राजा ने पूरी दान दहेज देकर बिदा कर दिया बंदर ने राजेश कों तो बना दिया अगले दिन नाई राजेश के घर आई राजेश के पत्नी को नोह बार काटने लिए नाई ने उसके पत्नी को देखि तो उसके होस उड़ गेय क्योकि राजेश की पत्नी बहुत सुन्देर थी वह मन ही मन सोचने लगी की ये बात राजा को जरुर बताउंगी नाइ नोह बार काटकर राजा के घर जाकर राजा के पत्नी से बोली ये रानी तुम तो उसके चरणों के धुल के माफिक हो तुम उसके चरणों के बराबर भी गोर नहीं हो इतना बात सुनकर 

बोली इतना सुन्दर है.की तुम मेरा उपमान कर रही हो ये बात राजा तक पहुच गई राजा ने अपने पहरेदार से बोला जाओ राजेश के घर और बोल दो की आज रात आठ बजे उसके घर मै आउंगा पहरेदारो ने जाकर बोल दिया ये बाते सुनकर राजेश ने बंदर से बोला अब क्या होगा राजा आज आठ बजे घर पर आकर रहने के लिए बोला है. बंदर बोला हमें कुछ सोचने दो कुछ देर सोचने के बाद बंदर बोला जैसा मै कहता हु वैसे ही करना है.उसने एक प्लानिंग बनाई की जब राजा घर आयेगा तो रात को एकला आयेगा जब कमरे में सोने जाएगा तो और सोते समय उसके गर्दन पर एक डंडा रखकर उसको वही ख़त्म कर देगे यही उसने सोचा और अपने परिवार यानि राजेश के पत्नी को सभी बात बताकर समझा दिया

राजा आया उसके मन में गलत विचार था की मै आज उसके साथ एक रात विताउंगा यही सोचते राजा ने उसके घर पहुच गया राजेश ने राजा को सेवा सत्कार किया बाते करते हुए रात को बारह बज गए फिर राजा ने सोने के लिए उसके कमरे में गए उस समय सभी गाव के लोग सो गए थे जैसे ही राजा ने पलंग पर सोने के लिए पलंग पर गया बंदर बोला अब सोचने की वक्त नहीं है. राजा ने अपने मौज करने के लिए दारु भी पि राखी थी जैसे ही पलंग पर लेटा तो उसके गर्दन पर डंडा रखकर जोर से दबाकर राजा को मार दिया राजेश बोला अब क्या करे ये तो ख़त्म हो गया है.

बंदर ने बोला इसको कंधे पर उठाओ और ले चलो जहा मै कहता हु राजा के राज्ये में दो ………..

 

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